महात्मा गांधी मानते थे कि भारत का किसान असली राजा है और देश को अपने किसानों को हमेशा राजा बना कर रखना होगा और देश के उद्योग पतियों को हमेशा देश के किसानों के हितों की रक्षा करनी होगी जिससे उद्योगपति और किसान दोनों मिलकर भारत के विकास में अपनी भागीदारी दे सकें शायद गांधी जी की यह सोच अकल्पनीय थी आज अगर गांधीजी होते तो शायद होने फिर से देश के किसानों को उनका हक दिलाने के लिए चंपारण जैसा कोई सत्याग्रह करना पड़ता क्योंकि आज भारत में किसानों की हालत बहुत दयनीय हो चुकी है इस वक्त चल रहे देश में किसान आंदोलन देखकर जिसका अंदाजा लगाना बिल्कुल भी आसान है जहां हमारा अन्नदाता लगभग 2 महीने से दिसंबर और जनवरी की कड़कड़ाती ठंड मे करोना जैसे महामारी के बीच सरकार से इंसाफ की आस लगाए दिल्ली की सीमाओं पर बहुत ही शांति से बैठा हुआ है बहुत ही शांति से बैठा हुआ है उसे आशा है उसे आशा है कि उसी के द्वारा और उसके देश के द्वारा और उसके देश के द्वारा देश के देश के लोगों के द्वारा चुनी गई सरकार उनके खिलाफ किए गए अन्याय को समझेगी और उन्हें बर्बाद होने से बचाएगी!